वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान का आतंकवाद को लेकर दोहरा रवैया एक बार फिर बेनकाब हो गया है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव के बीच, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से खूंखार आतंकी और 26/11 मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद को लेकर तीखा सवाल पूछा गया, तो उनकी बोलती बंद हो गई। पाक पीएम बिना कोई जवाब दिए वहां से चुपचाप निकल गए। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की जमकर फजीहत हो रही है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में एक मीडिया इंटरेक्शन के दौरान पत्रकारों ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को घेर लिया। इस दौरान एक पत्रकार ने सीधा और कड़ा सवाल दागा कि पाकिस्तान हाफिज सईद जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पनाह क्यों दे रहा है और भारत को सौंपने से क्यों बच रहा है?
इस सवाल को सुनते ही पीएम शहबाज शरीफ पूरी तरह असहज नजर आए। उन्होंने न तो सवाल का कोई तर्कसंगत जवाब दिया और न ही अपनी सरकार का बचाव किया, बल्कि सीधे मीडिया के कैमरों से नजरें चुराते हुए आगे बढ़ गए। उनकी इस चुप्पी को पाकिस्तान की नाकामी के रूप में देखा जा रहा है।
हाफिज सईद को लेकर भारत का सख्त रुख
भारत लंबे समय से जमात-उद-दावा (JuD) के सरगना और लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। हाफिज सईद भारत में हुए कई बड़े आतंकवादी हमलों का जिम्मेदार है। हालांकि पाकिस्तान दिखावे के तौर पर उस पर कार्रवाई का दावा करता है, लेकिन हकीकत यह है कि वह पाकिस्तान में सरकारी संरक्षण के तहत सुरक्षित है।
इस घटना के बड़े मायने:
- पाकिस्तान का बेनकाब होना: इस घटना ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान के पास आतंकवाद के सवाल पर विश्व बिरादरी को देने के लिए कोई जवाब नहीं है।
- कूटनीतिक स्तर पर हार: एक राष्ट्रप्रमुख का इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस या मीडिया के सवाल से भागना देश की अंतरराष्ट्रीय साख को गहरा धक्का पहुंचाता है।
- भारत के पक्ष की पुष्टि: भारत का हमेशा से यह कहना रहा है कि पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह (Safe Haven) बना हुआ है, जो इस घटना से एक बार फिर साबित हो गया।
निष्कर्ष: वैश्विक दबाव में पाकिस्तान
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों और हाफिज सईद जैसे आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कदम नहीं उठाता, तब तक वैश्विक मंचों पर उसकी इसी तरह किरकिरी होती रहेगी। शहबाज शरीफ की यह खामोशी दरअसल पाकिस्तान के उस डर को दर्शाती है, जिसे वह दुनिया के सामने छिपाने की कोशिश करता रहा है।