हाल ही में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। सदस्य देशों ने गहन विचार-विमर्श के बाद 'नई दिल्ली घोषणापत्र' (New Delhi Declaration) पर सर्वसम्मति दर्ज की है। इस साझा घोषणापत्र में वैश्विक शांति, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर ब्रिक्स देशों ने अपना रुख स्पष्ट किया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और बीबीसी (BBC) की रिपोर्टों के अनुसार, इस घोषणापत्र में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करने और फ़लस्तीन-ग़ज़ा संकट पर चिंता जताने के अलावा कई अन्य दूरगामी विषयों को शामिल किया गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस ऐतिहासिक घोषणापत्र की मुख्य बातें क्या हैं और किन मुद्दों पर सहमति बनी है।
1. आतंकवाद पर कड़ा रुख: पहलगाम हमले का ज़िक्र
घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी गतिविधियों की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए, सभी ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के हर रूप और अभिव्यक्ति के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प दोहराया।
- ज़ीरो टॉलरेंस नीति: आतंकवाद को किसी भी आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता।
- फंडिंग पर रोक: आतंकी संगठनों को मिलने वाले वित्तीय पोषण (Terror Financing) को समाप्त करने के लिए वैश्विक सहयोग पर बल दिया गया।
2. पश्चिम एशिया संकट: फ़लस्तीन और ग़ज़ा में सीज़फ़ायर की मांग
मध्य पूर्व (Middle East) में जारी मानवीय संकट, विशेषकर ग़ज़ा और फ़लस्तीन की स्थिति पर घोषणापत्र में गहरी चिंता व्यक्त की गई है। ब्रिक्स नेताओं ने तत्काल और स्थायी युद्धविराम (Ceasefire) की अपील की है।
- मानवीय सहायता: प्रभावित नागरिकों तक निर्बाध रूप से मानवीय मदद पहुंचाने की मांग की गई।
- टू-स्टेट सॉल्यूशन: फ़लस्तीन समस्या के स्थायी समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' का समर्थन किया गया।
3. घोषणापत्र में अन्य कौन-से प्रमुख मुद्दे शामिल हैं?
पहलगाम हमले और ग़ज़ा संकट के अलावा, नई दिल्ली घोषणापत्र में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है:
क) स्थानीय मुद्राओं में व्यापार (Trade in Local Currencies)
अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और वैश्विक वित्तीय प्रणाली को अधिक संतुलित बनाने के लिए सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) में व्यापार को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। इससे ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक लागत में कमी आएगी।
ख) संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थानों में सुधार
ब्रिक्स देशों ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसे वैश्विक संगठनों में व्यापक सुधार की मांग उठाई। घोषणापत्र में कहा गया है कि विकासशील देशों (Global South) को इन वैश्विक मंचों पर अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
ग) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिम्मेदार उपयोग
तेजी से बढ़ती तकनीक और Artificial Intelligence (AI) के दौर में, इसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग पर बल दिया गया। नेताओं ने माना कि AI का उपयोग मानव विकास के लिए होना चाहिए, न कि सुरक्षा चुनौतियों को बढ़ाने के लिए।
घ) जलवायु परिवर्तन और सतत विकास (Climate Action)
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने और विकासशील देशों को वित्तीय व तकनीकी सहायता प्रदान करने की बात कही गई। इसके साथ ही, 'जस्ट एनर्जी ट्रांजिशन' (Fair Energy Transition) को अपनाने पर जोर दिया गया।
भारत के लिए इस सहमति के क्या मायने हैं?
भारत की अध्यक्षता और पहल के तहत इस घोषणापत्र पर सहमति बनना कूटनीतिक दृष्टिकोण से एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। पहलगाम हमले को वैश्विक मंच पर रेखांकित करना और आतंकवाद के खिलाफ सख्त भाषा का इस्तेमाल होना भारत के रुख को मजबूती प्रदान करता है।
निष्कर्ष
ब्रिक्स का नई दिल्ली घोषणापत्र यह दर्शाता है कि वैश्विक चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद, विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं एक साझा मंच पर एकजुट हो सकती हैं। आतंकवाद से निपटने, शांति बहाली और आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर यह घोषणापत्र एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।