रूस के कज़ान शहर में आयोजित 16वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक बेहद प्रभावशाली रूप देखने को मिला। समिट के दौरान आयोजित पारंपरिक फोटो सेशन में पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ठीक बीच में खड़े नजर आए। इस तस्वीर ने न सिर्फ वैश्विक मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा, बल्कि दुनिया भर में भारत के मजबूत कूटनीतिक कद को भी रेखांकित किया।
टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के सैन्यीकरण पर बेबाक बोल
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बेबाकी से बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन और क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट आदि) को हथियार की तरह इस्तेमाल करना पूरी तरह से गलत है। पीएम मोदी ने कहा कि तकनीक और संसाधनों का उद्देश्य दुनिया के विकास को गति देना और समाज को सशक्त बनाना होना चाहिए, न कि किसी देश पर कूटनीतिक दबाव बनाना।
BRICS भाषण के प्रमुख बिंदु (Key Highlights)
प्रधानमंत्री मोदी ने समिट के दौरान वैश्विक शांति, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग पर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
- शांति और संवाद ही एकमात्र रास्ता: पीएम मोदी ने यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व के तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि "युद्ध से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता, शांति केवल कूटनीति और बातचीत से ही संभव है।"
- आतंकवाद पर दोहरा रवैया बर्दाश्त नहीं: उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण और इसे समर्थन देने वाले तत्वों के खिलाफ बिना किसी दोहरे रवैये के सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
- ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व: भारत ने एक बार फिर विकासशील और गरीब देशों (Global South) की चिंताओं और उनकी प्राथमिकताओं को BRICS के मुख्य एजेंडे में रखा।
- ग्लोबल संस्थानों में सुधार: पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में समय के अनुकूल सुधार करने की मांग उठाई।
पुतिन और जिनपिंग के बीच PM मोदी: क्या हैं कूटनीतिक मायने?
BRICS फोटो सेशन में पीएम मोदी का शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के बीच खड़ा होना कूटनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल ही में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त को लेकर हुए समझौते के बाद यह पहला मौका था जब दोनों नेता इतने करीब दिखे। इसके अलावा, पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद रूस के साथ भारत के प्रगाढ़ संबंध और चीन के साथ तनाव को कम करने की पहल भारत की 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' (रणनीतिक स्वायत्तता) को दर्शाती है।
निष्कर्ष
BRICS समिट 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण यह स्पष्ट करता है कि भारत विश्व मंच पर एक संतुलित, जिम्मेदार और मजबूत वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। टेक्नोलॉजी और मिनरल्स को हथियार न बनाने की उनकी सलाह आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नई प्रौद्योगिकियों के नियमों को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगी।