BRICS Summit 2024: ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के पहले दिन एक बड़ी कूटनीतिक सफलता देखने को मिली है। सम्मेलन के पहले ही दिन जारी किए गए 'जॉइंट डिक्लेरेशन' (साझा घोषणापत्र) को सभी सदस्य देशों ने अपनी सर्वसम्मति से मंज़ूरी दे दी है। इस घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा देना है।
ब्रिक्स जॉइंट डिक्लेरेशन की मुख्य बातें
सम्मेलन में सभी देशों की सहमति से पास हुए इस साझा घोषणापत्र में कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों को शामिल किया गया है:
- स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा: सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपनी स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।
- वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), विश्व बैंक और IMF जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की हिस्सेदारी बढ़ाने और तत्काल सुधार करने की बात कही गई है।
- आतंकवाद पर ज़ीरो टॉलरेंस: घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई है और इसके वित्तपोषण (Terror Financing) को रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर सख्त कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की गई है।
- वैश्विक आर्थिक स्थिरता: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने और खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
भारत की भूमिका और प्रधानमंत्री मोदी का रुख
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स मंच को एक वैश्विक समाधानकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया। भारत ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ केंद्रित संगठन नहीं है, बल्कि यह 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आवाज उठाने और दुनिया में शांति व स्थिरता कायम करने का एक महत्वपूर्ण जरिया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सहमति?
हालिया भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद पहले ही दिन जॉइंट डिक्लेरेशन पर सभी सदस्य देशों का सहमत होना यह दर्शाता है कि ब्रिक्स की प्रासंगिकता और एकता लगातार बढ़ रही है। नए सदस्य देशों के जुड़ने से ब्रिक्स अब एक अधिक शक्तिशाली और प्रभावी बहुध्रुवीय (Multipolar) विश्व व्यवस्था का निर्माण कर रहा है।
निष्कर्ष
ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन जॉइंट डिक्लेरेशन पर सभी देशों की मंज़ूरी मिलना इस बात का प्रमाण है कि विकासशील देश अब वैश्विक नीति-निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। आने वाले दिनों में यह घोषणापत्र विश्व राजनीति और व्यापारिक संबंधों को एक नया आकार देने में सहायक सिद्ध होगा।