अमेरिकी मध्यवधि चुनाव (US Midterm Elections) के नतीजों और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के लिए आए राजनीतिक झटकों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप की इस राजनीतिक स्थिति पर ईरान ने बेहद आक्रामक और तंजिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। ईरान के मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में ट्रंप के राजनीतिक पतन को लेकर खुशी मनाई जा रही है, और वहां के समाचार पत्रों ने उन्हें 'खतरनाक कूड़ा' तक कह डाला है।
ईरान की मीडिया का तीखा हमला: 'इतिहास के कचरा पात्र में गए ट्रंप'
ईरान के प्रमुख समाचार पत्रों और सरकारी मीडिया ने अमेरिकी चुनावों के नतीजों पर काफी सख्त और हास्यास्पद सुर्खियां छापी हैं। ईरान के विश्लेषकों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने न केवल मध्य पूर्व में तनाव बढ़ाया, बल्कि खुद अमेरिका के लिए भी मुश्किलें पैदा की थीं।
- कड़ा तंज: ईरानी मीडिया ने ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव के कम होने पर कहा कि उन्हें इतिहास के 'कूड़ेदान' में फेंक दिया गया है।
- जनता में राहत: तेहरान के स्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों ने ट्रंप समर्थित प्रत्याशियों की हार को एक कूटनीतिक जीत के रूप में देखा है।
ईरान और डोनाल्ड ट्रंप के बीच कड़वाहट की वजह क्या है?
ईरान और डोनाल्ड ट्रंप के बीच दुश्मनी कोई नई बात नहीं है। ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर होना
2018 में डोनाल्ड ट्रंप ने 2015 के ऐतिहासिक ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था और ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा था।
2. कासिम सुलेमानी की हत्या
जनवरी 2020 में ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के शीर्ष कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की बगदाद में हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद से ईरान ट्रंप से बदला लेने की फिराक में रहा है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर इसका क्या असर पड़ेगा?
अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। डोनाल्ड ट्रंप की पकड़ कमजोर होने से मध्य पूर्व और विशेष रूप से ईरान के साथ अमेरिका की भावी नीतियों में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। जो बाइडन प्रशासन अब ईरान के साथ परमाणु वार्ता को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर सकता है, हालांकि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
निष्कर्ष: डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान की यह तीखी प्रतिक्रिया दोनों देशों के बीच दशकों से चले आ रहे गहरे तनाव और दुश्मनी को दर्शाती है। मिडटर्म नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी घरेलू राजनीति का असर सीधे तौर पर वैश्विक कूटनीति पर पड़ता है।