राम नगरी अयोध्या ने एक बार फिर से इतिहास रच दिया है। दीपोत्सव के पावन अवसर पर सरयू नदी के 56 घाटों को 30 लाख से अधिक दीयों से रोशन किया गया, जिससे पूरी अयोध्या नगरी अलौकिक और स्वर्णिम आभा से जगमगा उठी। इस ऐतिहासिक और भव्य समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरयू तट पर पहुंचकर विशेष महाआरती की और देशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
सरयू तट पर उतरा देवलोक: 30 लाख दीयों से बना नया रिकॉर्ड
अयोध्या में आयोजित यह दीपोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज कराया। राम की पैड़ी समेत सरयू के 56 विभिन्न घाटों पर लाखों स्वयंसेवकों, छात्रों और स्थानीय निवासियों ने मिलकर दीये जलाए। शाम होते ही जैसे ही एक साथ 30 लाख दीये प्रज्वलित हुए, ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात देवलोक धरती पर उतर आया हो।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की भव्य सरयू आरती
इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरयू नदी के तट पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भव्य सरयू आरती उतारी। आरती के समय शंखनाद, डमरू की ध्वनि और 'जय श्री राम' के उद्घोष से पूरी अयोध्या नगरी गुंजायमान हो उठी। सीएम योगी के साथ राज्य के कई प्रमुख मंत्री, साधु-संत और विदेशी मेहमान भी इस क्षण के साक्षी बने।
दीपोत्सव 2024 की मुख्य विशेषताएं
- 30 लाख दीयों का प्रज्वलन: सरयू नदी के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाए गए।
- गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड: एक साथ सबसे अधिक दीये जलाने का नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया गया।
- भव्य लेजर एवं ड्रोन शो: दीपोत्सव के दौरान अत्याधुनिक 3D लेजर शो और 500 से अधिक ड्रोन्स के माध्यम से भगवान राम के जीवन चरित्र को दर्शाया गया।
- सांस्कृतिक शोभायात्रा: अयोध्या की सड़कों पर विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों द्वारा भगवान राम के जीवन पर आधारित भव्य झांकियां निकाली गईं।
राम मंदिर निर्माण के बाद पहला ऐतिहासिक दीपोत्सव
श्री राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के उद्घाटन और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहला दीपोत्सव था। यही कारण था कि इस बार श्रद्धालुओं और पर्यटकों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। पूरा शहर रोशनी की आधुनिक कलाकृतियों, फूलों और झालरों से सजाया गया था।
भक्ति और तकनीक का अद्भुत संगम
अयोध्या दीपोत्सव 2024 में प्राचीन परंपराओं और आधुनिक तकनीक का सुंदर मेल देखने को मिला। एक तरफ जहां पारंपरिक मिट्टी के दीये जल रहे थे, वहीं दूसरी तरफ आकाश में लेजर लाइट शो और ड्रोन शो ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सरयू की जलधारा में दीयों का प्रतिबिंब ऐसा लग रहा था मानो आकाश के तारे नदी में तैर रहे हों।
इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि अयोध्या का दीपोत्सव न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति और आस्था का एक अनूठा प्रतीक बन चुका है।