अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का महापर्व विजयादशमी (दशहरा) पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रावण दहन के भव्य कार्यक्रम में शिरकत की। भगवान श्रीराम के आदर्शों का स्मरण करते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और रावण रूपी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने का संकल्प लिया।
रावण दहन के मंच से पीएम मोदी का राष्ट्र को संबोधन
दिल्ली में आयोजित दशहरा महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने धनुष पर बाण चढ़ाकर रावण दहन का शुभारंभ किया। इसके बाद जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दशहरा केवल पुतला जलाने का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर और समाज में छिपी बुराइयों को समाप्त करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के लिए हमें एकजुट होकर देश की चुनौतियों का सामना करना होगा।
देश के 3 सबसे बड़े 'दुश्मन': पीएम मोदी ने किसे बताया चुनौती?
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के विकास में बाधा बन रहे 3 मुख्य आंतरिक दुश्मनों का जिक्र किया और इनसे मिलकर लड़ने की अपील की:
- भ्रष्टाचार और परिवारवाद: पीएम मोदी ने कहा कि देश की प्रगति को दीमक की तरह चाटने वाले भ्रष्टाचार और स्वार्थ को समाप्त करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
- जातिवाद और सामाजिक विभाजन: उन्होंने समाज में भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली जातिवादी सोच और क्षेत्रीयता के जहर को देश की अखंडता के लिए बड़ा खतरा बताया।
- गरीबी और अशिक्षा: देश के हर नागरिक को सशक्त बनाने के लिए गरीबी, कुपोषण और अशिक्षा जैसी बुराइयों का पूरी तरह से संहार करना आवश्यक है।
140 करोड़ देशवासियों से एकजुटता की अपील
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जिस तरह भगवान राम ने सब को साथ लेकर रावण का अंत किया था, ठीक उसी प्रकार 140 करोड़ भारतवासियों को भी एक होकर इन कुरीतियों के खिलाफ लड़ना होगा। "जब देश का हर नागरिक अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करेगा, तभी भारत हर बुराई पर विजय प्राप्त कर सकेगा।"
विजयदशमी का यह पर्व हमें सिखाता है कि न्याय और सत्य के मार्ग पर चलते हुए किसी भी विशालकाय बुराई को हराया जा सकता है। पीएम मोदी का यह संदेश देश के हर नागरिक को राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करता है।