जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों की सुस्त प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान यह मुद्दा जोर-शोर से उठा कि हजारों खाली पदों के लिए युवाओं से करोड़ों रुपये फीस के रूप में वसूल लिए गए, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी उन्हें नियुक्ति नहीं मिली है। इस बीच पुलिस वेरिफिकेशन और मिलिटेंसी (आतंकवाद) से जुड़े सवालों को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने गंभीर चिंता जताई है।
15,964 पद, 21 लाख आवेदन और 114 करोड़ रुपये की फीस
जम्मू-कश्मीर भर्ती बोर्डों (JKSSB और JKPSC) द्वारा निकाली गई विभिन्न भर्तियों के आंकड़ों ने सभी को हैरान कर दिया है। राज्य के युवाओं ने रोजगार की उम्मीद में दिन-रात एक करके पढ़ाई की और आवेदन फॉर्म भरे।
- कुल विज्ञापित पद: लगभग 15,964 पद
- कुल प्राप्त आवेदन: 21 लाख से अधिक फॉर्म
- वसूल की गई फीस: लगभग 114 करोड़ रुपये
इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म जमा होने और भारी भरकम राजस्व एकत्र होने के बावजूद, भर्ती प्रक्रियाएं या तो अदालती मामलों में फंसी हैं, रद्द कर दी गई हैं या पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर अटकी पड़ी हैं।
विधानसभा में उठा मुद्दा: मिलिटेंसी और CID वेरिफिकेशन पर सवाल
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सत्र के दौरान स्थानीय MLA ने युवाओं के दर्द को पटल पर रखा। उन्होंने कहा कि परीक्षा पास करने के बाद भी युवाओं को नियुक्ति पत्र नहीं मिल पा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण सुरक्षा जांच (CID Verification) में अत्यधिक सख्ती है।
विधायक ने आरोप लगाया कि 'जब युवा सिक्योरिटी क्लियरेंस के लिए जाते हैं, तो उनसे उनके दूर-दराज के रिश्तेदारों के पुराने इतिहास और मिलिटेंसी से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति के किसी दूर के रिश्तेदार का नाम 90 के दशक में किसी घटना से जुड़ा था, तो उसकी सजा आज के निर्दोष और पढ़े-लिखे युवाओं को दी जा रही है।'
युवाओं का दर्द: उम्र निकली जा रही, पैसे भी डूबे
जम्मू-कश्मीर का युवा एक तरफ बेरोजगारी की मार झेल रहा है, तो दूसरी तरफ बार-बार भर्ती परीक्षाएं रद्द होने और पेपर लीक जैसे मामलों से मानसिक तनाव में है। कई अभ्यर्थियों की सरकारी नौकरी पाने की तय उम्र सीमा (Age Limit) भी खत्म हो रही है।
भर्ती प्रक्रिया की प्रमुख समस्याएं एक नज़र में:
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| आवेदन फीस | विभिन्न भर्तियों के नाम पर युवाओं से ₹114 करोड़ से अधिक एकत्र किए गए। |
| वेरिफिकेशन में देरी | अत्यधिक सख्त पुलिस वेरिफिकेशन के कारण अंतिम चयन सूची अटक जाती है। |
| मानसिक तनाव | सालों तक परिणाम और नियुक्ति पत्र न मिलने से युवाओं में निराशा। |
| उम्र सीमा समाप्त | लंबे समय तक प्रक्रिया लटकने से कई अभ्यर्थी ओवर-एज हो गए हैं। |
क्या है पुलिस वेरिफिकेशन नीति में बदलाव की मांग?
विधायकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केंद्र शासित प्रदेश में शांति और सुरक्षा बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन किसी निर्दोष नागरिक को उसके किसी रिश्तेदार के अतीत के लिए सजा देना न्यायसंगत नहीं है।
सरकार से यह मांग की जा रही है कि:
- सहानुभूतिपूर्वक समीक्षा: CID और पुलिस वेरिफिकेशन नियमों को व्यावहारिक बनाया जाए ताकि बेकसूर युवाओं को नौकरी मिल सके।
- समयबद्ध प्रक्रिया: वेरिफिकेशन के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाए।
- फीस वापसी या राहत: जिन परीक्षाओं को रद्द किया गया है, उनकी फीस युवाओं को लौटाई जाए या अगली परीक्षा में छूट दी जाए।
निष्कर्ष
जम्मू-कश्मीर में 15,964 पदों के लिए 21 लाख से ज्यादा आवेदनों का आना राज्य में बेरोजगारी की भयावह स्थिति को दर्शाता है। 114 करोड़ रुपये जैसी विशाल राशि खर्च करने के बाद भी यदि युवाओं को केवल आश्वासनों और कड़े वेरिफिकेशन का सामना करना पड़े, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय है। सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इन भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी और त्वरित बनाए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. जम्मू-कश्मीर भर्ती से जुड़ा हालिया विवाद क्या है?
हालिया विवाद 15,964 पदों के लिए 21 लाख आवेदकों से ₹114 करोड़ फीस लेने के बावजूद नौकरियां न मिलने और पुलिस वेरिफिकेशन में अत्यधिक सख्ती को लेकर है।
2. विधानसभा में MLA ने मिलिटेंसी वेरिफिकेशन पर क्या कहा?
MLA ने कहा कि वेरिफिकेशन के दौरान युवाओं से उनके दूर के रिश्तेदारों की पुरानी गतिविधियों और मिलिटेंसी से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं, जिससे निर्दोष अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रुक जाती हैं।
3. युवाओं की मुख्य मांगें क्या हैं?
युवाओं की मुख्य मांगें भर्ती प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना, वेरिफिकेशन नियमों में ढील देना और पारदर्शी तरीके से नियुक्ति पत्र प्रदान करना हैं।