NEET UG Rajasthan Counselling: राजस्थान में नीट यूजी (NEET UG) काउंसलिंग के तहत एमबीबीएस (MBBS) में दाखिले की दौड़ अब अपने अंतिम पड़ाव यानी स्ट्रे वैकेंसी राउंड (Stray Vacancy Round) तक पहुंच चुकी है। स्टेट काउंसलिंग अथॉरिटी द्वारा जारी ताजा सीट मैट्रिक्स के अनुसार, प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल 1077 सीटें रिक्त बची हुई हैं। हालांकि, इन आंकड़ों के पीछे की हकीकत उन मध्यमवर्गीय और सामान्य परिवारों के छात्रों के लिए चिंताजनक है जो कम फीस पर डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हैं।
कुल रिक्त 1077 सीटों में से 1068 सीटें निजी मेडिकल कॉलेजों में हैं, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में महज 9 सीटें बची हैं। सबसे अहम बात यह है कि सरकारी कॉलेजों की इन 9 सीटों में से भी कम फीस वाली नॉर्मल (गवर्नमेंट कोटा) सीटें सिर्फ 6 हैं, जबकि बाकी 3 सीटें मैनेजमेंट कोटे की हैं जिनकी फीस काफी अधिक होती है।
सीट मैट्रिक्स का संक्षिप्त विवरण (Seat Matrix Overview)
काउंसलिंग बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सीटों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
| कॉलेज का प्रकार | कुल रिक्त MBBS सीटें | फीस की स्थिति |
|---|---|---|
| निजी मेडिकल कॉलेज (Private Colleges) | 1068 | अत्यधिक महंगी (15 लाख से 25+ लाख प्रतिवर्ष) |
| सरकारी कॉलेज (Government Quota) | 06 | न्यूनतम / नियमित सरकारी फीस |
| सरकारी कॉलेज (Management Quota) | 03 | सरकारी मैनेजमेंट फीस (8 से 10 लाख प्रतिवर्ष) |
| कुल रिक्त सीटें | 1077 | - |
सरकारी कॉलेजों में बचीं केवल 9 सीटें, मुकाबला होगा बेहद कड़ा
राजस्थान के विभिन्न गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजों में रिक्त बचीं 9 सीटों पर दाखिला पाने के लिए कटऑफ काफी ऊंची रहने की संभावना है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिन 6 सीटों पर सामान्य सरकारी फीस लागू है, उन पर केवल वही अभ्यर्थी दावा कर पाएंगे जिनकी ऑल इंडिया रैंक (AIR) और स्टेट रैंक काफी मजबूत है। शेष 3 सीटें राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (RajMES) के तहत आने वाले मेडिकल कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटे की हैं, जिनका शुल्क आम सरकारी सीटों की तुलना में कई गुना अधिक होता है।
प्राइवेट कॉलेजों में 1068 सीटें खाली रहने का क्या है कारण?
प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में 1000 से अधिक सीटें खाली रहना कोई नई बात नहीं है। हर साल स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक यही स्थिति बनती है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- अत्यधिक ट्यूशन फीस: निजी कॉलेजों में एमबीबीएस की सालाना फीस 18 लाख से लेकर 28 लाख रुपये तक है, जिससे पूरे कोर्स का खर्च 85 लाख से 1 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाता है।
- बैंक गारंटी की अनिवार्यता: कई निजी मेडिकल कॉलेज छात्रों से आगामी वर्षों की फीस के लिए भारी-भरकम बैंक गारंटी की मांग करते हैं, जिसे सामान्य परिवार पूरा नहीं कर पाते।
- अन्य छुपे हुए चार्ज: हॉस्टल फीस, मेस चार्ज, डेवलपमेंट फंड और लैबोरेट्री फीस के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जाता है।
स्ट्रे वैकेंसी राउंड के प्रमुख नियम और पात्रता शर्तें
यदि आप स्ट्रे वैकेंसी राउंड में भाग लेने जा रहे हैं, तो राजस्थान नीट यूजी काउंसलिंग बोर्ड के इन महत्वपूर्ण नियमों को अवश्य ध्यान में रखें:
- पहले से सीट अलॉटेड छात्र अपात्र: जिन अभ्यर्थियों को पिछले किसी भी राउंड (राउंड 1, राउंड 2 या मॉप-अप/राउंड 3) में ऑल इंडिया कोटा या स्टेट कोटा के तहत सीट मिल चुकी है और उन्होंने ज्वाइन कर लिया है, वे इस राउंड के लिए योग्य नहीं होंगे।
- सिक्योरिटी डिपॉजिट अनिवार्य: स्ट्रे वैकेंसी राउंड में फ्रेश चॉइस फिलिंग के लिए निर्धारित सिक्योरिटी राशि (सरकारी के लिए अलग और प्राइवेट कॉलेजों के लिए अधिक) जमा कराना अनिवार्य होता है।
- सीट न लेने पर पेनाल्टी: यदि किसी अभ्यर्थी को स्ट्रे वैकेंसी राउंड में सीट आवंटित कर दी जाती है और वह रिपोर्ट नहीं करता है, तो उसकी सिक्योरिटी राशि जब्त कर ली जाएगी और आगामी वर्षों के लिए नीट परीक्षा से डिबार भी किया जा सकता है।
छात्रों के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि छात्र चॉइस फिलिंग करते समय केवल उन्हीं प्राइवेट कॉलेजों का चयन करें जिनकी फीस का भुगतान करने में उनका परिवार सक्षम हो। बिना फीस संरचना (Fee Structure) को समझे केवल एमबीबीएस सीट पाने के लालच में विकल्प न भरें, क्योंकि सीट अलॉट होने के बाद एडमिशन न लेने पर बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या स्ट्रे वैकेंसी राउंड में नई रजिस्ट्रेशन की अनुमति है?
जी हां, काउंसलिंग बोर्ड द्वारा निर्धारित शेड्यूल के अनुसार पात्र छात्रों को फ्रेश रजिस्ट्रेशन और चॉइस फिलिंग का मौका दिया जाता है।
Q2. सरकारी कॉलेज की 6 सीटों पर कटऑफ क्या रहने की उम्मीद है?
चूंकि सरकारी सीटें मात्र 6 हैं, इसलिए कटऑफ बेहद कड़ी रहने वाली है। केवल वही छात्र इन पर कब्जा कर पाएंगे जो पिछले राउंड्स में कुछ ही अंकों या रैंक से चूक गए थे।
Q3. क्या प्राइवेट कॉलेजों की खाली सीटों पर फीस कम हो सकती है?
आधिकारिक रूप से फीस नियामक समिति द्वारा तय की गई फीस ही ली जाती है, हालांकि कुछ कॉलेज खाली सीटों को भरने के लिए स्ट्रे राउंड के अंतिम समय में अलग-अलग रियायतें दे सकते हैं, जिसकी पुष्टि कॉलेज स्तर पर ही की जा सकती है।