इजरायल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की कुर्सी पर संकट के बादल गहराने लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में इजरायल की अरब पार्टियों ने पूर्व सेना प्रमुख और प्रमुख नेता गादी आइज़ेनकोट (Gadi Eisenkot) को नई सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन देने की बात कही है। इस फैसले को नेतन्याहू के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
अरब पार्टियों का ऐतिहासिक फैसला और नया समीकरण
इजरायली संसद (नेसेट) में अरब पार्टियों की भूमिका हमेशा से बेहद निर्णायक रही है। नेतन्याहू की सख्त नीतियों और वर्तमान राजनीतिक स्थिति से नाराज अरब गठबंधन ने साफ संकेत दिया है कि वे नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्ष का साथ देने को तैयार हैं। गादी आइज़ेनकोट के नेतृत्व में बनने वाली संभावित सरकार को समर्थन देकर अरब पार्टियां देश में एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू करना चाहती हैं।
कौन हैं गादी आइज़ेनकोट?
गादी आइज़ेनकोट इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व प्रमुख (Chief of Staff) रह चुके हैं और वर्तमान में देश के सम्मानित राजनीतिक चेहरों में से एक हैं। सैन्य पृष्ठभूमि और कूटनीतिक सूझबूझ के कारण उन्हें विपक्ष और अन्य गुटों में स्वीकार्य नेता के रूप में देखा जा रहा है। नेशनल यूनिटी पार्टी के माध्यम से वे लगातार देश में राजनीतिक स्थिरता लाने की वकालत करते रहे हैं।
नेतन्याहू की सत्ता पर मंडराता संकट
बेंजामिन नेतन्याहू, जो इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे हैं, वर्तमान में कई मोर्चों पर घिरे हुए हैं:
- गाजा संघर्ष और सुरक्षा चुनौतियां: देश के भीतर युद्ध को संभालने के तरीके को लेकर भारी असंतोष है।
- जनता का भारी विरोध: इजरायल में लगातार नेतन्याहू के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसमें उनके इस्तीफे की मांग की जा रही है।
- संसदीय बहुमत का खतरा: यदि अरब पार्टियां और अन्य विपक्षी दल एक साथ आते हैं, तो नेतन्याहू की सरकार अपना बहुमत खो सकती है।
इस राजनीतिक उलटफेर के मुख्य बिंदु:
- नेतन्याहू को बेदखल करने की तैयारी: विपक्ष और अरब पार्टियां मिलकर एक नया विकल्प पेश करने की रणनीति बना रही हैं।
- आइज़ेनकोट का बढ़ता कद: एक पूर्व सैन्य प्रमुख के रूप में आइज़ेनकोट को देश की सुरक्षा और राजनीति दोनों को संभालने में सक्षम माना जा रहा है।
- इजरायल की भविष्य की दिशा: नई सरकार बनने की स्थिति में इजरायल की आंतरिक और विदेश नीतियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
इजरायल का राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अरब पार्टियों द्वारा गादी आइज़ेनकोट को समर्थन देने का यह प्रस्ताव नेतन्याहू के राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। आने वाले दिन इजरायल के लोकतंत्र और वहां की सरकार के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।