मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर लंबी बातचीत की है। इस फोन कॉल के बाद ट्रम्प का एक बेहद आक्रामक और बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ इजराइल और सहयोगियों का काम अभी पूरा नहीं हुआ है और उनके 1-2 प्रमुख ठिकाने उड़ाने अभी बाकी हैं।
ट्रम्प की नेतन्याहू से बातचीत: क्या हुई चर्चा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत मध्य पूर्व के मौजूदा हालात और ईरान द्वारा किए जा रहे हमलों के जवाब में की गई इजराइली कार्रवाई पर केंद्रित थी। ट्रम्प ने नेतन्याहू के सख्त रुख की सराहना करते हुए संकेत दिया कि ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर कड़ा प्रहार किया जाना बेहद जरूरी है।
- रणनीतिक सैन्य ठिकाने: ट्रम्प का मानना है कि ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमता को पूरी तरह कमजोर करने के लिए उसके बचे हुए 1-2 महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाना जरूरी है।
- इजराइल का समर्थन: ट्रम्प ने साफ किया कि अमेरिका को इजराइल की सुरक्षा और उसकी सैन्य कार्रवाइयों का खुलकर समर्थन करना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव और 4-5 नवंबर का कनेक्शन
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है जब अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं। 4 नवंबर और चुनाव की पूर्व संध्या पर मध्य पूर्व के हालात अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गए हैं:
डोनाल्ड ट्रम्प लगातार बाइडन-हैरिस प्रशासन की विदेश नीति पर सवाल उठा रहे हैं। उनका दावा है कि अगर वे राष्ट्रपति होते, तो मध्य पूर्व में ऐसा युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता। वहीं दूसरी ओर, चुनावी माहौल के बीच ट्रम्प के इस बयान ने राष्ट्रपति बाइडन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस पर कूटनीतिक दबाव और बढ़ा दिया है।
इस बयान के वैश्विक और रणनीतिक मायने
ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच हुई इस बातचीत और उसके बाद आए बयान के कई गंभीर मायने निकाले जा रहे हैं:
1. इजराइल-ईरान संघर्ष में तेजी की आशंका
अगर इजराइल आने वाले दिनों में ईरान के उन '1-2 ठिकानों' पर हमला करता है, तो मध्य पूर्व में एक पूर्ण पैमाने (Full-scale War) के युद्ध का खतरा बढ़ जाएगा।
2. वैश्विक तेल और अर्थव्यवस्था पर असर
ईरान पर किसी भी बड़े हमले से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बाधित हो सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है।
3. अमेरिकी विदेश नीति में बड़ा बदलाव
यदि 5 नवंबर के चुनाव में ट्रम्प की वापसी होती है, तो ईरान के प्रति अमेरिकी रुख और अधिक कठोर हो सकता है, जिससे इजराइल को खुलकर सैन्य कार्रवाई करने की छूट मिल सकती है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान केवल एक चुनावी रणनीति नहीं है, बल्कि यह मध्य पूर्व के आने वाले भविष्य का एक संकेत भी हो सकता है। 4 नवंबर और अमेरिकी चुनाव के नतीजों के बीच दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इजराइल आने वाले दिनों में ईरान पर कोई नया बड़ा प्रहार करता है या नहीं।