देहरादून: भारतीय सेना में चार साल की सेवा पूरी करने वाले उत्तराखंड के अग्निवीरों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी और राहत भरी खबर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को राज्य की सरकारी नौकरियों में समायोजित करने के लिए औपचारिक नियमावली जारी कर दी है। इस नियमावली में सबसे अहम स्पष्टीकरण यह किया गया है कि अग्निवीरों को मिलने वाले क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण के साथ-साथ अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का मूल आरक्षण भी यथावत मिलता रहेगा।
उत्तराखंड शासन ने जारी की संशोधित नियमावली
कार्मिक एवं सतर्कता विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रदेश में चार साल की सफल सेवा पूरी करने के बाद लौटने वाले अग्निवीरों को समूह 'ग' (Group C) के विभिन्न पदों पर विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि अग्निवीरों के लिए तय विशेष कोटे का लाभ लेते समय आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यानी आरक्षित श्रेणियों के युवाओं को उनके संबंधित वर्ग (SC/ST/OBC/EWS) का लाभ भी मिलेगा।
नियमावली के प्रमुख बिंदु: एक नज़र में
- संवैधानिक आरक्षण सुरक्षित: अग्निवीर कोटे के अंतर्गत आवेदन करने वाले एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के युवाओं को उनकी मूल श्रेणी का लाभ भी सुनिश्चित किया जाएगा।
- सीधी भर्ती में विशेष कोटा: राज्य पुलिस, पीएसी (PAC), वन आरक्षी (Forest Guard), आबकारी सिपाही और जेल वार्डर जैसी वर्दीधारी सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10% तक क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
- आयु सीमा में छूट: अग्निवीरों को सरकारी भर्ती में भाग लेने के लिए अधिकतम आयु सीमा में 3 से 5 वर्ष की विशेष छूट दी जाएगी।
- शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में राहत: सेना में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके इन युवाओं को सिविल भर्ती की शारीरिक माप-जोख और दक्षता परीक्षा में भी विशेष मानक छूट का प्रावधान है।
आरक्षण और चयन प्रक्रिया का ढांचा
राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों के अनुसार अग्निवीरों के चयन का ढांचा इस प्रकार रहेगा:
| श्रेणी / लाभ | प्रावधान |
|---|---|
| लक्षित पद | ग्रुप 'ग' के वर्दीधारी एवं तकनीकी पद |
| क्षैतिज आरक्षण | निर्धारित पदों पर 10 प्रतिशत तक कोटा |
| वर्गवार आरक्षण (SC/ST/OBC) | मूल श्रेणी के अनुसार नियमानुसार लागू |
| आयु सीमा में रियायत | सामान्य वर्ग को 3 वर्ष, आरक्षित वर्ग को 5 वर्ष तक |
किन विभागों में पहले मिलेगा मौका?
गृह विभाग और वन विभाग में रिक्त पड़े पदों पर आगामी चरणों में होने वाली भर्तियों में इस नियमावली को तुरंत प्रभाव से लागू किया जा रहा है। उत्तराखंड पुलिस कांस्टेबल, उप-निरीक्षक (SI), फॉरेस्ट गार्ड, और आपदा प्रबंधन बल (SDRF) में अनुशासित और प्रशिक्षित पूर्व सैनिकों/अग्निवीरों की तैनाती से विभागों की कार्यक्षमता में इजाफा होगा।
युवाओं और पूर्व सैनिकों में उत्साह का माहौल
उत्तराखंड को 'सैन्य धाम' के नाम से जाना जाता है, जहाँ हर घर से कोई न कोई सदस्य सेना या सुरक्षा बलों से जुड़ा है। केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के बाद युवाओं में चार साल बाद भविष्य को लेकर जो संशय था, उत्तराखंड सरकार के इस स्पष्ट और पुख्ता कदम से वह चिंता काफी हद तक समाप्त हो गई है। सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए एससी-एसटी आरक्षण को अक्षुण्ण रखना सरकार का अत्यंत संतुलित फैसला माना जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या अग्निवीर कोटे के भीतर SC/ST आरक्षण का लाभ अलग से मिलेगा?
हाँ, नियमावली के तहत यदि कोई अग्निवीर अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग से संबंधित है, तो उसे उसकी श्रेणी के अनुसार निर्धारित आरक्षण एवं छूट का पूरा लाभ मिलेगा।
2. अग्निवीरों को राज्य की किन भर्तियों में प्राथमिकता मिलेगी?
मुख्य रूप से उत्तराखंड पुलिस, पीएसी, जेल सुरक्षा, वन विभाग और आबकारी विभाग जैसी वर्दीधारी सेवाओं के समूह 'ग' पदों पर प्राथमिकता दी जाएगी।
3. क्या अन्य राज्यों के अग्निवीर भी उत्तराखंड में इस आरक्षण का लाभ ले सकते हैं?
नहीं, इस नियमावली के तहत आरक्षण एवं आयु छूट का लाभ केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासी (Domicile holders) अग्निवीरों को ही प्रदान किया जाएगा।