इजरायल की राजनीति में 'किंग बीबी' के नाम से मशहूर बिन्यामिन नेतन्याहू एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक और मीडिया संस्थान इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि क्या नेतन्याहू रिकॉर्ड सातवीं बार इसराइल के प्रधानमंत्री बनने में सफल हो पाएंगे? लंबे समय तक सत्ता पर काबिज रहने और कई बड़े राजनीतिक तूफानों से सफलतापूर्वक निकलने वाले नेतन्याहू के लिए आने वाला समय बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
नेतन्याहू का अब तक का ऐतिहासिक राजनीतिक सफर
बिन्यामिन नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री हैं। वे पहली बार 1996 में देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद उन्होंने कई अलग-अलग कार्यकालों में इजरायल की बागडोर संभाली। अपनी मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा नीति, आर्थिक सुधारों और कट्टर दक्षिणपंथी छवि के दम पर उन्होंने अपनी पार्टी 'लिकुड' (Likud) को हमेशा चुनावी दौड़ में आगे रखा है।
सातवीं बार पीएम बनने की राह में मुख्य चुनौतियां
नेतन्याहू के सातवीं बार सत्ता में आने के रास्ते में इस बार कई गंभीर बाधाएं हैं, जो उनके राजनीतिक भविष्य को अनिश्चित बनाती हैं:
- गाजा संघर्ष और बंधक संकट: अक्टूबर 2023 के घटनाक्रम के बाद से जारी गाजा युद्ध और हमास द्वारा बंधक बनाए गए इजरायलियों की सुरक्षित वापसी को लेकर इजरायली जनता में नेतन्याहू सरकार के प्रति भारी नाराजगी है।
- व्यापक जन-विरोध: इजरायल की सड़कों पर लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों में समय से पहले चुनाव कराने और नेतन्याहू के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
- कानूनी और भ्रष्टाचार के मामले: नेतन्याहू पिछले कई वर्षों से रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोपों में अदालती कार्यवाहियों का सामना कर रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव: गाजा में मानवीय संकट को लेकर अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों के साथ इजरायल के संबंधों में खिंचाव आया है, जिसका असर नेतन्याहू की अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ा है।
क्या नेतन्याहू के पास वापसी की संभावना बची है?
तमाम दबावों के बावजूद, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिन्यामिन नेतन्याहू को कभी भी खारिज नहीं किया जा सकता। उनके पक्ष में कुछ महत्वपूर्ण कारक अभी भी काम कर रहे हैं:
- मजबूत दक्षिणपंथी गठबंधन: इजरायल में कट्टरपंथी और दक्षिणपंथी मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग आज भी नेतन्याहू को देश की सुरक्षा के लिए सबसे भरोसेमंद नेता मानता है।
- विपक्ष में एकजुटता की कमी: इजरायल के विपक्षी दल वैचारिक रूप से बिखरे हुए हैं, जिससे नेतन्याहू के खिलाफ एक स्थायी और मजबूत विकल्प खड़ा करना मुश्किल साबित हो रहा है।
- राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कला: नेतन्याहू को इजरायली राजनीति का 'ग्रेट सर्वाइवर' कहा जाता है। वे अंतिम समय में गठबंधन बनाने और समीकरण बदलने में माहिर माने जाते हैं।
निष्कर्ष: आगे क्या हो सकता है?
बिन्यामिन नेतन्याहू का सातवीं बार प्रधानमंत्री बनना इस बात पर निर्भर करेगा कि इजरायल में अगले आम चुनाव कब होते हैं और उस समय देश के हालात क्या रहते हैं। यदि वे अपने वर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन को बचाए रखने में सफल रहते हैं और सुरक्षा मुद्दों पर जनता का विश्वास फिर से हासिल कर लेते हैं, तो उनकी वापसी संभव है। हालांकि, मौजूदा गाजा संकट और घरेलू असंतोष को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यह नेतन्याहू के राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन परीक्षा है।