दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत (India) का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबदबा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, दुनिया के सबसे शक्तिशाली संगठन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC - United Nations Security Council) में भारत को अभी भी स्थायी सदस्यता का इंतजार है। भारत अब तक 8 बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है, लेकिन उसका लक्ष्य वीटो पावर (Veto Power) के साथ स्थायी सीट हासिल करना है।
आखिर भारत UNSC में स्थायी सीट क्यों चाहता है? भारत ने पहली बार अपनी दावेदारी कब पेश की थी और इस राह में कौन सी चुनौतियां हैं? आइए, इस पूरे मुद्दे को विस्तार से समझते हैं।
UNSC में भारत क्यों चाहता है स्थायी सीट?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वर्तमान में 5 स्थायी सदस्य (P5 - अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) हैं। भारत का तर्क है कि 1945 में बना यह ढांचा 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाता है। भारत की दावेदारी के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- वैश्विक आबादी का प्रतिनिधित्व: भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश है। दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारत में रहता है, इसलिए इतने बड़े वर्ग को वैश्विक निर्णयों में स्थायी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
- मजबूत अर्थव्यवस्था: भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
- UN शांति मिशन (Peacekeeping) में बड़ा योगदान: भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले देशों में शामिल है। भारतीय जवानों ने दुनिया भर में शांति स्थापित करने के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया है।
- ग्लोबल साउथ (Global South) की आवाज: भारत विकासशील और गरीब देशों की आवाज बनकर उभरा है। UNSC में भारत की मौजूदगी से विकासशील देशों के हितों की बेहतर रक्षा हो सकेगी।
8 बार रह चुका है अस्थायी सदस्य
भारत सुरक्षा परिषद के जिम्मेदार सदस्यों में से एक रहा है। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि भारत को अब तक 8 बार UNSC का अस्थायी सदस्य (Non-Permanent Member) चुना जा चुका है। भारत का कार्यकाल निम्नलिखित वर्षों में रहा है:
- 1950-1951
- 1967-1968
- 1972-1973
- 1977-1978
- 1984-1985
- 1991-1992
- 2011-2012
- 2021-2022
हर बार अपने कार्यकाल के दौरान भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, वैश्विक शांति और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत की है।
भारत ने पहली बार कब पेश की थी दावेदारी?
हालांकि आजादी के तुरंत बाद भी इस मुद्दे पर बातचीत हुई थी, लेकिन औपचारिक रूप से भारत ने 1990 के दशक में शीत युद्ध (Cold War) के खत्म होने के बाद UNSC सुधारों की मांग उठानी शुरू की।
भारत ने 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 49वें सत्र के दौरान पहली बार आधिकारिक और कड़े शब्दों में सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट के लिए अपना दावा पेश किया। इसके बाद 2004-05 में भारत ने ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ मिलकर G4 गुट बनाया, जो एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं।
किन देशों का मिल रहा है समर्थन और कहाँ अटकी है बात?
भारत की दावेदारी का समर्थन दुनिया के अधिकांश देश करते हैं। P5 देशों में से 4 देश — अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन — खुले तौर पर भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं।
मुख्य चुनौतियां:
- चीन का अड़ंगा: P5 देशों में केवल चीन ही एकमात्र ऐसा देश है जो भारत की स्थायी सदस्यता और वीटो पावर का विरोध करता है। वह हर बार सुधार की प्रक्रिया को टालने की कोशिश करता है।
- UN सुधारों की धीमी गति: संयुक्त राष्ट्र की अपनी प्रक्रियाएं इतनी जटिल हैं कि सुरक्षा परिषद के ढांचे में बदलाव (UNSC Reforms) करना बेहद धीमा काम साबित हो रहा है।
- कॉफी क्लब (Uniting for Consensus): पाकिस्तान, इटली जैसे कुछ देशों का समूह (कॉफी क्लब) सुरक्षा परिषद में नए स्थायी सदस्यों को जोड़ने का विरोध करता है।
निष्कर्ष
आज का भारत 1945 का भारत नहीं है। अगर संयुक्त राष्ट्र को अपनी प्रासंगिकता और प्रभावशीलता बनाए रखनी है, तो उसे 21वीं सदी के अनुसार खुद में सुधार करना ही होगा। भारत को UNSC की स्थायी सीट मिलना न केवल भारत के सम्मान की बात है, बल्कि यह संपूर्ण विश्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।