देश में समान नागरिक संहिता (UCC - Uniform Civil Code) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश भर में UCC लागू करने के संकल्प को दोहराने के बाद राजनीति गरमा गई है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे देश के लिए जरूरी कानून मान रही है, वहीं दूसरी तरफ NDA के ही 3 प्रमुख सहयोगी दलों ने इस पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
अमित शाह का बड़ा ऐलान: UCC लागू करने की तैयारी
हाल ही में अपने बयानों में गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया कि UCC केंद्र सरकार के प्रमुख एजेंडे में शामिल है। उत्तराखंड में इसे लागू किए जाने के बाद अब केंद्र सरकार इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की रूपरेखा तैयार कर रही है। भाजपा का मानना है कि एक देश में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में एक समान कानून होना चाहिए।
BJP के अपने ही 3 सहयोगियों ने क्यों दी चेतावनी?
UCC पर अमित शाह के आक्रामक रुख के बीच NDA गठबंधन के 3 प्रमुख घटक दलों ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार को सतर्क किया है। इन दलों का मानना है कि भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है:
- पूर्वोत्तर और आदिवासी अधिकारों की चिंता: पूर्वोत्तर के सहयोगी दलों और आदिवासी बहुल राज्यों के नेताओं का कहना है कि उनकी सदियों पुरानी रूढ़िवादी परंपराओं और विशेष अधिकारों को UCC से बाहर रखा जाना चाहिए।
- व्यापक आम सहमति की मांग: आंध्र प्रदेश और बिहार के प्रमुख सहयोगी दलों ने स्पष्ट किया है कि UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले सभी धार्मिक, सामाजिक और क्षेत्रीय हितधारकों से विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
- अल्पसंख्यक समुदायों का विश्वास: सहयोगियों का मानना है कि इस कानून को किसी समुदाय विशेष पर थोपा हुआ नहीं महसूस होना चाहिए, बल्कि इसे आपसी समझ और संवाद से लाया जाना चाहिए।
गठबंधन सरकार में UCC लागू करना कितना आसान?
NDA 3.0 सरकार में भाजपा के पास अकेले पूर्ण बहुमत नहीं है, जिससे सहयोगियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में UCC बिल को संसद में पास कराना एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी चुनौती साबित हो सकता है। विपक्ष के विरोध के साथ-साथ अब सरकार को अपने ही सहयोगियों को मनाना होगा और उनकी चिंताओं को दूर करना होगा।
आगे का रास्ता: क्या बीच का रास्ता निकालेगी सरकार?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार UCC के प्रारूप में पूर्वोत्तर के राज्यों और कुछ विशिष्ट आदिवासी क्षेत्रों को छूट (Exemption) दे सकती है। यदि ऐसा होता है, तो ही NDA के सहयोगी दल इस बिल का समर्थन कर सकते हैं।
निष्कर्ष
UCC पर अमित शाह के ऐलान के बाद भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार अपने सहयोगियों की चेतावनियों और मांगों के बीच कैसे सामंजस्य बिठाती है और UCC बिल का ड्राफ्ट किस रूप में संसद में पेश किया जाता है।