Highlights:
3 मई का पेपर कैंसिल: लीक और धांधली के आरोपों के बाद 12 मई को NTA ने रद्द की थी परीक्षा।
21 जून (आज) का इम्तिहान: देश-विदेश के 5,440 केंद्रों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजामों के बीच खत्म हुआ री-एग्जाम।
टेलीग्राम पर बैन: अफवाहों और पेपर लीक रोकने के लिए सरकार ने देश भर में टेलीग्राम ऐप को 22 जून तक के लिए किया अस्थाई तौर पर ब्लॉक।
भारत के इतिहास में मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम को लेकर शायद ही कभी ऐसा तनाव देखा गया हो, जैसा आज यानी 21 जून 2026 को देखने को मिला। 3 मई को हुई NEET UG परीक्षा में बड़े पैमाने पर पेपर लीक (विशेषकर राजस्थान के सीकर और महाराष्ट्र के लातूर के कोचिंग सेंटर्स से जुड़े तार) और धांधली के खुलासे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को बैकफुट पर आना पड़ा था। 12 मई को परीक्षा रद्द होने के बाद आज देश के 22.79 लाख से ज़्यादा डॉक्टरी के उम्मीदवारों ने एक बार फिर परीक्षा केंद्रों का रुख किया।
लेकिन सवाल वही है—क्या इस बार परीक्षा सच में फुलप्रूफ थी, और इस दोबारा हुई परीक्षा में क्या-क्या बदला? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
1. 3 मई को आखिर ऐसा क्या हुआ था?
3 मई 2026 को हुई परीक्षा के ठीक बाद ही वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर एक 'गेस पेपर' वायरल हुआ था, जिसके करीब 120 सवाल असली नीट परीक्षा से हूबहू मैच कर रहे थे। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच में सामने आया कि पुणे और लातूर के कुछ कोचिंग संचालकों और स्कूल प्रिंसिपल्स ने विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) की मदद से पेपर पहले ही एक्सेस कर लिया था और छात्रों को 15-15 लाख रुपये में सवाल रटवाए जा रहे थे। छात्रों के भविष्य और देश की मेडिकल व्यवस्था की साख को देखते हुए परीक्षा को रद्द करना ही एकमात्र रास्ता बचा था।
2. इस बार क्या बदला? सुरक्षा के 'लोहे के इंतजाम'
NTA और शिक्षा मंत्रालय इस बार कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं थे। आज हुई परीक्षा में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया था:
AI-बेस्ड रियल-टाइम मॉनिटरिंग: पहली बार देश भर के 95,000 से अधिक परीक्षा कमरों में 1,38,560 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। इनका लाइव फीड सीधे दिल्ली स्थित NTA हेडक्वार्टर और शिक्षा मंत्रालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के जरिए मॉनिटर किया जा रहा था ताकि कोई भी संदिग्ध हलचल तुरंत पकड़ी जा सके।
सिग्नल जामर्स की फौज: परीक्षा केंद्रों के आसपास किसी भी तरह की इलेक्ट्रॉनिक चीटिंग या ब्लूटूथ डिवाइस को नाकाम करने के लिए 51,311 मोबाइल जामर्स इंस्टॉल किए गए थे।
थ्री-टियर चेकिंग और बायोमेट्रिक: छात्रों को सुबह 11 बजे से ही केंद्रों पर एंट्री दी गई। इस बार सिर्फ एडमिट कार्ड और ऑरिजिनल आईडी ही अंदर ले जाने की इजाजत थी, यहाँ तक कि पेन भी NTA ने खुद मुहैया कराया। गहन फ्रिस्किंग (तलाशी) और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के बाद ही सीट मिली।
इंटरनेट और टेलीग्राम पर सर्जिकल स्ट्राइक: री-एग्जाम के दौरान किसी भी तरह की अफवाह या लीक मटीरियल को फैलने से रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने देश भर में टेलीग्राम ऐप को 22 जून तक के लिए अस्थाई रूप से ब्लॉक कर दिया।
3. आज परीक्षा के बाद कैसा रहा छात्रों का रिएक्शन?
शाम 5:15 बजे जब छात्र परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले, तो उनके चेहरों पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं थीं।
पेपर का स्तर (Exam Analysis): अधिकतर छात्रों का कहना था कि आज का पेपर 3 मई के मुकाबले काफी लंबा (Lengthy) और कठिन था।
Physics & Chemistry: स्टूडेंट्स के मुताबिक फिजिक्स और केमिस्ट्री के सवाल काफी कैलकुलेटिव और मुश्किल थे।
Biology: बायोलॉजी का सेक्शन आसान था, लेकिन बॉटनी और जूलॉजी के सवालों को पढ़ने में काफी समय लग रहा था।
कई छात्रों ने बताया कि दोबारा परीक्षा देने के कारण उन पर मानसिक दबाव बहुत ज़्यादा था। एक महीने का अतिरिक्त समय तो मिला, लेकिन इस डर ने पीछा नहीं छोड़ा कि 'कहीं इस बार भी कुछ गड़बड़ न हो जाए'। हालांकि, परीक्षा केंद्रों के बाहर खड़े पेरेंट्स ने इस बार की कड़ी सुरक्षा और व्यवस्थाओं (जैसे शेड्स और पीने के पानी के इंतजाम) पर संतोष जताया।
निष्कर्ष: क्या बहाल हो पाएगा भरोसा?
NEET UG 2026 का री-एग्जाम करा लेना सरकार और NTA के लिए एक बड़ी प्रशासनिक जीत तो है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। जब तक रिजल्ट पूरी पारदर्शिता के साथ सामने नहीं आता और CBI जांच में शामिल दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, तब तक देश के लाखों परिवारों में परीक्षा सिस्टम को लेकर खोया हुआ भरोसा पूरी तरह बहाल होना मुश्किल है। उम्मीद है कि यह दोबारा हुई परीक्षा उन 22 लाख से ज़्यादा बच्चों की मेहनत को उसका असली हक दिलाएगी, जो दिन-रात एक कर डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हैं।
